🪔 Introduction | भूमिका

English:
In the fast-paced modern world, wealth and stability have become the foundation of a peaceful life. Yet, according to ancient Indian scriptures, true prosperity (Aishwarya) arises not merely from effort but through the divine grace of Goddess Lakshmi — the embodiment of beauty, fortune, and abundance. The Atharvaveda declares:

“Maa Lakshmiḥ Jātavedase dadhātu”O Agni! May Goddess Lakshmi dwell in my home with endless radiance.

These sacred words echo the truth that wealth is not earned alone; it is invited through purity, devotion, and correct spiritual vibration.

हिन्दी:
आज के तेज़ रफ्तार जीवन में धन और स्थिरता शांति का आधार बन चुके हैं। परंतु प्राचीन भारतीय शास्त्रों के अनुसार, वास्तविक ऐश्वर्य केवल परिश्रम से नहीं, बल्कि देवी लक्ष्मी की कृपा से प्राप्त होता है। अथर्ववेद में कहा गया है —

“मा लक्ष्मीः जातवेदसे दधातु”हे अग्नि! लक्ष्मी मेरी गृह में अनंत तेज सहित विराजमान हों।

यह मन्त्र स्पष्ट करता है कि धन केवल कर्म से नहीं, बल्कि शुद्धता, भक्ति और सही स्पंदनों से आमंत्रित होता है।


📿 1️⃣ Kamala Trikon Yantra Sadhana | कमला त्रिकोण यन्त्र साधना



English:
This secret ritual from the text involves worshipping the Kamala Trikon Yantra — a triangular Lakshmi Yantra energized during Shukla Paksha Friday under a Pushya Nakshatra.

Procedure:

  1. Draw a red triangle on a copper plate using vermilion.

  2. Write the mantra “ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं क्लीं नमः॥” in its center.

  3. Offer lotus flowers, honey, and rice.

  4. Chant the mantra 108 times for 21 days.

Benefits: Invokes Mahalakshmi’s energy, ensuring steady financial inflow and removal of karmic poverty.
Precaution: Avoid performing during Amavasya or Rahu Kaal.

हिन्दी:
यह प्रयोग कमला त्रिकोण यन्त्र की आराधना पर आधारित है, जो शुक्ल पक्ष शुक्रवार को पुष्य नक्षत्र में किया जाता है।

विधि:

  1. ताम्रपत्र पर सिंदूर से त्रिकोण बनाएं।

  2. मध्य में लिखें — “ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं क्लीं नमः॥”

  3. कमल पुष्प, मधु और अक्षत अर्पित करें।

  4. 21 दिनों तक प्रतिदिन 108 बार जप करें।

फल: महालक्ष्मी की स्थायी कृपा प्राप्त होती है, दरिद्रता दूर होती है।
सावधानी: अमावस्या या राहुकाल में साधना न करें।


🌸 2️⃣ Dhanada Yakshini Sadhana | धनदा यक्षिणी साधना


English:
As revealed in Dr. Shrimali’s compilation, Dhanada Yakshini is one of the sixteen wealth-granting energies serving Goddess Lakshmi.

Mantra:

“ॐ ह्रीं श्रीं धनदा यक्षिण्यै नमः॥”

Process:

  • Begin on a Friday night of Shukla Paksha.

  • Sit facing north with a ghee lamp of five wicks.

  • Chant the mantra 1008 times daily for 11 nights.

  • Keep a silver coin before the image; it becomes magnetized with wealth vibrations.

Benefits: Brings unexpected inflow of money, career rise, and victory over debt.

हिन्दी:
डा. श्रीमाली जी के ग्रंथ में वर्णित धनदा यक्षिणी लक्ष्मी की 16 सेविकाओं में से एक हैं।

मन्त्र:

“ॐ ह्रीं श्रीं धनदा यक्षिण्यै नमः॥”

विधि:

  • शुक्ल पक्ष के शुक्रवार की रात्रि से आरंभ करें।

  • उत्तर दिशा की ओर मुख करके पंचमुखी दीपक जलाएँ।

  • 11 रात्रियों तक प्रतिदिन 1008 बार जप करें।

  • चाँदी का सिक्का सामने रखें; उसमें धनाकर्षण शक्ति जाग्रत होती है।

फल: आकस्मिक धनलाभ, कर्ज से मुक्ति, पदोन्नति।


💰 3️⃣ Kubera–Lakshmi Joint Invocation | कुबेर–लक्ष्मी संयुक्त आवाहन

English:

The Agni Purana states that Goddess Lakshmi never arrives alone — she is accompanied by Lord Kubera, the treasurer of heaven. This ritual harmonizes both forces.

Steps:

  1. Place a Kuber Yantra and Shri Yantra side by side.

  2. Offer fragrant sandalwood paste and rice grains.

  3. Chant the dual mantra:

    “ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं महालक्ष्म्यै नमः। ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धनाधिपतये नमः॥”

  4. Continue for 21 days during Brahma Muhurta.

Benefits: Ensures continuous growth, wealth multiplication, and financial stability.

हिन्दी:
अग्नि पुराण में कहा गया है कि देवी लक्ष्मी कभी अकेली नहीं आतीं, वे कुबेर देव के साथ विराजमान होती हैं।

विधि:

  1. श्री यन्त्र और कुबेर यन्त्र को साथ रखें।

  2. चन्दन और अक्षत से पूजन करें।

  3. संयुक्त मन्त्र जपें —

    “ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं महालक्ष्म्यै नमः। ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धनाधिपतये नमः॥”

  4. 21 दिनों तक ब्रह्म मुहूर्त में करें।

फल: धनवृद्धि, स्थायित्व, और व्यापारिक सफलता।


🌕 4️⃣ Purnima Chandra-Lakshmi Sadhana | पूर्णिमा चन्द्र-लक्ष्मी साधना



English:
According to Lakshmi Tantra, on full moon nights, the goddess manifests through the brilliance of the moon.

Procedure:

  • Sit under the open sky facing the moon.

  • Keep a silver bowl filled with milk and sugar.

  • Recite:

    “ॐ ह्रीं श्रीं चन्द्रायै महालक्ष्म्यै नमः॥” (108 times)

  • After chanting, drink the milk as prasād.

Benefits: Enhances charm, peace, and attracts monetary luck through mind purity.

हिन्दी:
लक्ष्मी तंत्र के अनुसार पूर्णिमा की रात्रि में चन्द्र के प्रकाश में लक्ष्मी की दिव्य आभा प्रकट होती है।

विधि:

  • खुले आकाश के नीचे चन्द्रमुख होकर बैठें।

  • दूध व शक्कर से भरा चाँदी का पात्र रखें।

  • मन्त्र जपें —

    “ॐ ह्रीं श्रीं चन्द्रायै महालक्ष्म्यै नमः॥” (108 बार)

  • साधना के बाद दूध को प्रसाद रूप में ग्रहण करें।

फल: सौन्दर्य, शांति, और धनप्राप्ति की संभावना बढ़ती है।


🔱 5️⃣ Ashta-Lakshmi Invocation | अष्ट-लक्ष्मी आवाहन साधना



English:
In Vedic metaphysics, Goddess Lakshmi manifests in eight forms — Adi, Dhana, Dhanya, Gaja, Santana, Vijaya, Veera, and Aishwarya Lakshmi.

Steps:

  1. Draw eight petals on a clean floor using rice paste.

  2. In each petal, chant the name and mantra of one Lakshmi form.

  3. Offer lotus petals, turmeric, and camphor.

  4. Conclude with collective aarti chanting:

    “ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं महालक्ष्म्यै नमः॥”

Benefits: Brings complete prosperity — material, spiritual, and familial.

हिन्दी:
वैदिक मतानुसार देवी लक्ष्मी अष्ट रूपों में विराजमान हैं — आदि, धन, धान्य, गज, सन्तान, विजय, वीर, ऐश्वर्य लक्ष्मी

विधि:

  1. आटे या चावल के घोल से आठ पंखुड़ियों वाला चक्र बनाएं।

  2. प्रत्येक पंखुड़ी पर लक्ष्मी के आठ नामों का जप करें।

  3. कमल, हल्दी व कपूर अर्पित करें।

  4. अंत में सामूहिक आरती करें —

    “ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं महालक्ष्म्यै नमः॥”

फल: संपूर्ण ऐश्वर्य, परिवारिक सुख और आध्यात्मिक उन्नति।


🪙 6️⃣ Bhoot-Shuddhi Lakshmi Prayog | भूत-शुद्धि लक्ष्मी प्रयोग

English:

This rare ritual purifies the five elements (Pancha-Mahabhuta) within the practitioner, aligning them to Lakshmi’s cosmic vibration.

Process:

  • Sit on a white asana and perform deep breathing with the mantra “ॐ ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः” inhaling through the right nostril, exhaling through the left.

  • Do this 108 times daily for 9 days.

Result: Body aura becomes magnetic to wealth and harmony; removes Vastu and planetary blockages.

हिन्दी:
यह दुर्लभ प्रयोग साधक के पंचमहाभूतों को शुद्ध करता है और उन्हें लक्ष्मी की ऊर्जा से समन्वित करता है।

विधि:

  • सफेद आसन पर बैठकर “ॐ ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः” मन्त्र से श्वास-प्रश्वास करें।

  • दाएँ नथुने से श्वास लें, बाएँ से छोड़ें।

  • 9 दिनों तक प्रतिदिन 108 बार करें।

फल: शरीर की आभा लक्ष्मीमय बनती है, ग्रहदोष और वास्तुदोष शांत होते हैं।


🌺 7️⃣ Nav-Pushpa Lakshmi Archana | नव-पुष्प लक्ष्मी अर्चना

English:
Using nine sacred flowers dedicated to Lakshmi — Lotus, Jasmine, Hibiscus, Parijat, Champa, Mogra, Bela, Rose, and Marigold — one performs Archana for immediate divine grace.

Procedure:

  1. Offer each flower chanting “ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं महालक्ष्म्यै नमः।”

  2. Visualize the home glowing with golden light.

  3. Perform for 9 Fridays.

Effect: Brings peace, affection, harmony, and sudden wealth gain.

हिन्दी:
इस प्रयोग में लक्ष्मी जी के नव पुष्पों — कमल, चमेली, गुड़हल, पारिजात, चम्पा, मोगरा, बेला, गुलाब, गेंदा — से अर्चना की जाती है।

विधि:

  1. प्रत्येक पुष्प चढ़ाते हुए जपें — “ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं महालक्ष्म्यै नमः।”

  2. अपने घर को स्वर्ण आभा में कल्पना करें।

  3. 9 शुक्रवार तक यह साधना करें।

फल: शांति, प्रेम, सौभाग्य, और आकस्मिक धनप्राप्ति।


🌼 Conclusion | उपसंहार

English:
These Lakshmi Prapti Ke Durlabh Prayog are not mere rituals — they are energetic technologies encoded by ancient rishis to align human consciousness with the frequency of abundance. When performed with faith, purity, and discipline, they awaken a state where wealth becomes effortless and sacred.

Begin your Lakshmi Sadhana journey today — not to chase money, but to invite divine prosperity that nourishes both spirit and life.

हिन्दी:
ये लक्ष्मी प्राप्ति के दुर्लभ प्रयोग केवल कर्मकाण्ड नहीं हैं, बल्कि ये ऐसी ऊर्जात्मक विधाएँ हैं जो साधक को समृद्धि के स्पंदनों से जोड़ती हैं। जब इन्हें श्रद्धा और अनुशासन से किया जाता है, तब धन स्वतः आकर्षित होता है और जीवन दिव्यता से परिपूर्ण होता है।

आज ही अपनी लक्ष्मी साधना यात्रा प्रारम्भ करें — धन के पीछे नहीं, बल्कि दिव्य समृद्धि को आमंत्रित करने के लिए।


⚖️ Disclaimer | अस्वीकरण

English:
The above article is a scholarly and devotional summary based on the rare book “Lakshmi Prapti ke Durlabh Prayog” authored by Dr. Narayan Dutt Shrimali — a revered scholar of Tantra and Sanatan Dharma.
All rituals, mantras, and methods described are drawn from that sacred text. Any unintentional errors in interpretation or translation are to be humbly forgiven.
Readers are encouraged to refer to the original book by Dr. Shrimali for complete details and authoritative guidance.

हिन्दी:
उपरोक्त लेख डा॰ नारायण दत्त श्रीमाली द्वारा रचित दुर्लभ ग्रन्थ “लक्ष्मी प्राप्ति के दुर्लभ प्रयोग” पर आधारित एक शास्त्रीय व भक्तिपूर्ण सारांश है।
इसमें वर्णित सभी साधनाएँ, मन्त्र और विधियाँ उक्त मूल ग्रन्थ से ली गई हैं। लेखन या अनुवाद में किसी प्रकार की त्रुटि हो तो क्षमायाचना सहित उसे क्षम्य समझें।
विस्तृत एवं प्रामाणिक जानकारी हेतु कृपया डा॰ श्रीमाली जी के मूल ग्रन्थ का अध्ययन करें।


ॐ नमः शिवाय।
ॐ नमः शिवाय।

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